डॉ. अजय मोहन सेमवाल/देहरादून
उत्तराखंड की देवभूमि से उभरे अनूप सेमवाल सेवा, संगठन और समर्पण की मिसाल हैं। आरएसएस से शुरू हुई उनकी यात्रा आज भाजपा के प्रदेश संयोजक तक पहुँची है। आपदा राहत से जनसेवा तक, युवा ऊर्जा से अनुभवी नेतृत्व तक—उनकी कहानी उत्तराखंड के राजनीतिक भविष्य की नई आशा है।!!!!!!

उत्तराखंड की देवभूमि की पहाड़ियों से निकलकर राष्ट्र और संगठन की सेवा में समर्पित एक व्यक्तित्व की कहानी आज जब कही जाती है तो वह केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं रह जाती, बल्कि पूरे समाज और राजनीति के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। अनूप सेमवाल उसी कहानी के नायक हैं। तीस अप्रैल उन्नीस सौ चौरासी को जन्मे अनूप सेमवाल का मूल निवास रुद्रप्रयाग जनपद की केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के टेमरिया-डुमार गाँव में है। वर्तमान में वे नाकोट, अगस्त्यमुनि में निवास करते हैं। उनके पिता स्वर्गीय श्री रमेश चन्द्र सेमवाल थे। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने शिक्षा, संगठन और जनसेवा के क्षेत्र में जो ऊँचाइयाँ छुई हैं, वे किसी भी युवा के लिए मिसाल हैं।
अनूप सेमवाल की शैक्षिक यात्रा भी उतनी ही सुव्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण रही जितनी उनकी संगठनात्मक यात्रा। दो हजार तीन में उन्होंने अगस्त्यमुनि के स्वर्गीय श्री तारादत्त महाविद्यालय से बी.एससी. की डिग्री हासिल की। इसके बाद दो हजार छह में गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से रसायन विज्ञान में एम.एससी. पूर्ण किया। दो हजार आठ में उसी विश्वविद्यालय से बी.एड. किया और दो हजार तेरह में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी से शिक्षाशास्त्र में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। विज्ञान और शिक्षाशास्त्र की यह ठोस नींव उनके व्यक्तित्व में तार्किकता, अनुशासन और युवाओं के प्रति संवेदनशीलता का मिश्रण लेकर आई। व्यवसाय के रूप में वे अगस्त्यमुनि में श्री गणपति बैक्वेट हॉल का संचालन करते हैं, जो स्थानीय स्तर पर उनके सामाजिक संपर्क को और मजबूत बनाता है।
उनकी सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के साथ हुई। तब से लेकर आज तक वे राष्ट्र, समाज और संगठन के प्रति निरंतर समर्पित रहे हैं। उन्नीस सौ अट्ठानवे में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जुड़े। दो हजार दो-तीन में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख बने। दो हजार चार-पाँच में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य का दायित्व संभाला। दो हजार छह से दस तक जिला संगठन मंत्री के रूप में कार्य किया। इन वर्षों में उन्होंने छात्र संगठन की जड़ों को मजबूत किया, कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण किया और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दो हजार दस से सोलह तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा, उत्तराखंड के प्रदेश मंत्री रहे। युवा मोर्चा का यह छह वर्षीय कार्यकाल उनके लिए युवाओं को जोड़ने, उनके मुद्दों को उठाने और पार्टी की युवा इकाई को सशक्त बनाने का अवसर बना। दो हजार सोलह से इक्कीस तक वे भारतीय जनता पार्टी के रुद्रप्रयाग जनपद के जिला महामंत्री रहे। स्थानीय स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क बढ़ाने और चुनावी तैयारियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। दो हजार बाईस से पच्चीस तक वे भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड के आपदा राहत सेवाएँ विभाग के प्रदेश सहसंयोजक रहे। और दो हजार छब्बीस से वर्तमान में वे इसी विभाग के प्रदेश संयोजक के रूप में कार्यरत हैं तथा प्रदेश टीम के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।
यह पदक्रम केवल पदों की सूची नहीं है। यह एक निरंतर यात्रा है जिसमें प्रत्येक चरण ने उन्हें अगले चरण के लिए तैयार किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरू हुई यह यात्रा विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा, जिला महामंत्री और अंततः प्रदेश स्तर के महत्वपूर्ण विभाग तक पहुँची। आपदा राहत सेवाएँ विभाग का प्रभार उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है जहाँ प्राकृतिक आपदाएँ बार-बार आती रहती हैं। बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय नेतृत्व करना उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके साथ ही युवा मार्गदर्शन, संगठन विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, जन जागरूकता अभियान, धार्मिक-सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता तथा किसान और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ कार्य उनके सामाजिक योगदान के प्रमुख आयाम हैं।
अनूप सेमवाल का अपना संकल्प स्पष्ट है। वे कहते हैं कि उनका संकल्प उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक तक सेवा, सुरक्षा और संवेदनशीलता पहुँचाना है। संगठन की विचारधारा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनसेवा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के लिए वे सदैव समर्पित रहेंगे। यह संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ उनकी तस्वीरें, वरिष्ठ नेताओं को ज्ञापन सौंपते हुए और सामाजिक कार्यक्रमों में सम्मानित होते हुए उनके सक्रिय जनसंपर्क और स्वीकार्यता को दर्शाती हैं।
अब जब हम उत्तराखंड के राजनीतिक भविष्य की ओर देखते हैं तो अनूप सेमवाल जैसे नेताओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उत्तराखंड की राजनीति में संगठन की मजबूती, स्थानीय जड़ों और विशेषज्ञता का विशेष महत्व है। अनूप सेमवाल के पास ये तीनों तत्व मौजूद हैं। रुद्रप्रयाग-केदारनाथ क्षेत्र की संवेदनशील भूमि से निकलकर प्रदेश स्तर तक पहुँचना आसान नहीं होता। केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं की गहरी समझ उनके पास है।
दो हजार सत्ताईस के विधानसभा चुनाव और उसके बाद के वर्षों में उत्तराखंड की राजनीति कई नए मोड़ ले सकती है। युवा पलायन, रोजगार, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना, पर्यटन का सतत विकास, कृषि और महिलाओं का सशक्तिकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। अनूप सेमवाल का आपदा राहत विभाग का अनुभव उन्हें इन मुद्दों पर बोलने और काम करने का ठोस आधार देता है। संगठन में उनके लंबे अनुभव के कारण कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता है। छात्र राजनीति से लेकर युवा मोर्चा और मुख्य पार्टी संगठन तक की यात्रा ने उन्हें हर स्तर पर कार्यकर्ताओं से जोड़ा है।
राजनीतिक भविष्य की दृष्टि से उनकी संभावनाएँ कई दिशाओं में खुलती दिखती हैं। संगठन में और ऊँची जिम्मेदारियाँ मिलना एक स्वाभाविक संभावना है। प्रदेश कार्यकारिणी या अन्य महत्वपूर्ण विभागों में उनकी भूमिका बढ़ सकती है। चुनावी राजनीति में भी अवसर आ सकते हैं। स्थानीय स्तर की मजबूत जड़ें और प्रदेश स्तर का अनुभव उन्हें विधानसभा या अन्य चुनावी मंचों के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बना सकता है। केदारनाथ या आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान पहले से ही बनी हुई है। युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी को संगठन से जोड़ने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि वे स्वयं छात्र और युवा संगठन से आए हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में निरंतरता और विश्वसनीयता का विशेष महत्व है। अनूप सेमवाल की यात्रा एक ऊर्जावान पढ़े लिखे सामाजिक युवक की कहानी है जो जनहित के मुद्दों पर कंधे से कंधा मिलाकर जनता के साथ चलता है
यह निरंतरता ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। वे अभी अपेक्षाकृत युवा हैं और आने वाले दो-तीन दशकों तक सक्रिय रह सकते हैं। इस दौरान यदि वे चुनावी मैदान में उतरते हैं या संगठन में नीति निर्माण की भूमिका निभाते हैं तो उनकी पृष्ठभूमि उन्हें मजबूत आधार प्रदान करेगी।
आपदा प्रबंधन का क्षेत्र भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आपदा राहत सेवाएँ विभाग का अनुभव रखने वाले नेता की भूमिका न केवल राहत कार्यों तक सीमित रहेगी बल्कि पूर्व तैयारी, जनजागरूकता और नीति निर्माण तक विस्तृत होगी। अनूप सेमवाल इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं है। सेवा, संगठन और समर्पण के मूल्यों पर आधारित राजनीति भी संभव है। ‘सेवा ही लक्ष्य, संगठन ही शक्ति, राष्ट्र प्रथम’ का मंत्र उनके जीवन का आधार है। ‘सेवा • संगठन • समर्पण’ की त्रयी उनके कार्यों में दिखाई देती है। वे समाजसेवी, संगठनकर्ता और जनसेवक के रूप में जाने जाते हैं।
अनूप सेमवाल की यात्रा अभी जारी है। दो हजार छब्बीस में प्रदेश संयोजक का दायित्व संभालते हुए वे प्रदेश टीम के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो चुके हैं। आने वाले वर्ष उनके लिए और अधिक अवसर लेकर आ सकते हैं। उत्तराखंड का राजनीतिक भविष्य ऐसे ही समर्पित, अनुभवी और जमीनी नेताओं पर निर्भर करेगा जो संगठन को मजबूत रखें, जनसेवा को प्राथमिकता दें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। अनूप सेमवाल इन्हीं मूल्यों के वाहक हैं। उनकी कहानी पहाड़ों से निकलकर बड़े सपनों को साकार करने की कहानी है।
