डॉ. अजय मोहन सेमवाल/देहरादून
क्राइम सिटी राजधानी देहरादून

हिमालयी राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अपनी शांत फिजा अच्छे मौसम और यहां की प्रसिद्ध लीची और बासमती के लिए जानी जाती थी परंतु अब इसके स्थान पर राजधानी देहरादून को क्राइम सिटी के रूप में देखा जा रहा है माफियाओं और गैंगस्टरों को शरण देने में उत्तराखंड पीछे नहीं रहा,यक्ष प्रश्न यह है कि राज्य पुलिस की गुप्तचर एजेंसियां क्यो हाथ पैर हाथ धरे क्यो बैठ रही है उनको क्यों जानकारियां नहीं प्राप्त हो पा रही है या फिर जानकारी प्राप्त होने के बाद भी मौन व्रत धारण करना मजबूरी है।
हिमालय राज्य उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी—कभी शांत घाटियों, शिक्षा के केंद्र, रिटायरमेंट की पसंदीदा जगह और सुरक्षित जीवन का प्रतीक था। यहां की हरी-भरी सड़कें, स्कूल-कॉलेज और शाम की शांति पर्यटकों व स्थानीय निवासियों को आकर्षित करती थी। शहर की यह छवि तेजी से धूमिल हो रही है।2000 में राज्य गठन के समय यहां की जनता ने सपना देखा था कि यह नया राज्य स्थानीय विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन को बढ़ावा और सबसे महत्वपूर्ण—सुरक्षा और शांति का प्रतीक बनेगा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, खासकर 2020 के बाद से 2026 तक, राज्य की यह छवि तेजी से धूमिल हो रही है। अपराध दर में उतार-चढ़ाव के साथ हिंसक घटनाओं का बढ़ना, महिलाओं के खिलाफ अपराध, साइबर फ्रॉड, संगठित अपराध और सांप्रदायिक तनाव ने ‘देवभूमि’ को एक ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया है जहां शांति अब खतरे में है। सबसे चिंताजनक पहलू राजधानी देहरादून का है, जो कभी रिटायरमेंट, शिक्षा और सुरक्षित जीवन का प्रतीक था, लेकिन अब सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में ‘क्राइम सिटी’ के रूप में उभर रहा है। लगातार हिंसक हत्याएं, दिनदहाड़े गोलीकांड, संगठित अपराध और महिलाओं की असुरक्षा की घटनाएं अब रोजमर्रा की खबर बन गई हैं।
16 दिनों में 5 हत्याएं….
फरवरी 2026 की शुरुआत में देहरादून ने एक अभूतपूर्व हिंसा का दौर देखा। मात्र 16 दिनों में जिले में 5 हत्याएं दर्ज हुईं, जिनमें से शहर में 3 घटनाएं दिनदहाड़े हुईं।
29 जनवरी: विकासनगर में 18 वर्षीय छात्र की हत्या।
31 जनवरी: ऋषिकेश में एक महिला की गोली मारकर हत्या।
2 फरवरी: शहर में युवती का गला काटकर हत्या।
11 फरवरी: तिब्बती मार्केट के पास गैस एजेंसी मालिक अर्जुन शर्मा की गोली मारकर हत्या।
13 फरवरी: राजपुर रोड पर सिल्वर सिटी मॉल के बाहर जिम से लौटते 45 वर्षीय विक्रम शर्मा (झारखंड मूल के कारोबारी, 50+ आपराधिक मामलों में आरोपी) की तीन अज्ञात हमलावरों द्वारा पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारकर हत्या।
ये घटनाएं सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि उनकी प्रकृति से डरावनी हैं—सार्वजनिक स्थानों पर, व्यस्त सड़कों पर, मॉल के बाहर। विक्रम शर्मा की हत्या SSP आवास से महज 500 मीटर दूर हुई, जो पुलिस की मौजूदगी पर सवाल उठाती है। पुलिस ने इसे गैंगवार से जोड़ा, लेकिन आम नागरिकों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि अपराधी बेखौफ हो गए हैं।
अपराध के आंकड़े।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट्स और राज्य पुलिस के आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड में अपराध की स्थिति मिश्रित लेकिन गंभीर चिंता वाली है। NCRB की 2024 रिपोर्ट (2025 में जारी) के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 12% की कमी आई है—2022 में 4,337 मामलों से घटकर 2024 में 3,342 हो गए। साइबर यौन अपराधों में भी 13% गिरावट दर्ज हुई, और चोरी के मामलों में रिकवरी दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी (52%) रही। पुलिस ने अपहरण के 530 मामलों में 94% और दुष्कर्म के 98% मामलों का खुलासा किया।
2023 में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शीर्ष पर था, और तीन वर्षों (2021-2023) में औसत वृद्धि 11% रही। 2025-2026 में हिंसक अपराधों का ग्राफ ऊपर चढ़ा है।
ये घटनाएं सरेआम हुईं, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनीं। परिणामस्वरूप, सरकार ने पुलिस में बड़े फेरबदल किए—देहरादून SSP अजय सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात की और संगठित अपराध पर नजर रखने के निर्देश दिए।
साइबर अपराध में भी स्थिति चिंताजनक रही—2023 में ₹69 करोड़ के नुकसान से 2024 में ₹170 करोड़ तक पहुंचा (146% वृद्धि)। हालांकि, 2024 में रिकवरी बेहतर हुई। महिलाओं की सुरक्षा पर NARI 2025 रिपोर्ट (नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स ऑन वुमेंस सेफ्टी) में देहरादून को 31 शहरों में से टॉप 10 असुरक्षित शहरों में शामिल किया गया, जहां स्कोर मात्र 60.6% (राष्ट्रीय औसत 64.6%) रहा। रात में सुरक्षा की भावना कम है—केवल 26% महिलाओं ने पुलिस से मदद मांगी, 19% ने दूसरों से ।2025 सर्वे में देहरादून में अपराध बढ़ने की चिंता 70.50% लोगों ने जताई, जबकि ड्रग्स और भ्रष्टाचार मध्यम से उच्च स्तर पर हैं। राज्य में कुल अपराध दर NCRB के अनुसार 2023 में 252.8 प्रति लाख रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन हिंसक अपराधों (हत्या, अपहरण) में वृद्धि चिंता का विषय है।शांत शहर से ‘क्राइम सिटी’ तक का दुखद सफर
देहरादून कभी पहाड़ी शांति और शिक्षा का केंद्र था। लेकिन तेज शहरीकरण, प्लेन क्षेत्र से बाहरी राज्यों की आबादी, अनियोजित निर्माण और प्रवासन ने स्थिति बदल दी। 2025-2026 में हत्याओं का सिलसिला—वाणी विहार में 3.5 लाख की लूट, प्रेमनगर में दुश्मनी में हत्या—ने शहर की छवि खराब की। सोशल मीडिया पर #DehradunCrime और #CrimeCity ट्रेंड कर रहे हैं।
महिलाओं के लिए स्थिति और गंभीर है। NARI रिपोर्ट में देहरादून को असुरक्षित बताया गया, हालांकि पुलिस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सर्वे का सैंपल छोटा है और डायल-112 पर महिलाओं से जुड़े केवल 18% शिकायतें आईं। फिर भी, वास्तविकता में रात में बाहर निकलने की डर, सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।उत्तराखंड की छवि खराब होने के लंबे समय से चल रहे कारणयह समस्या रातोंरात नहीं उभरी। राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी कई मुद्दे अनसुलझे हैं।
क्यों बन रहा उत्तराखंड अपराधियों का अड्डा?
यह समस्या नई नहीं, लेकिन 2025-2026 में तेज हुई है। प्रमुख कारण:भौगोलिक और प्रशासनिक ढील: पहाड़ी राज्य होने के बावजूद मैदानी इलाके (टिहरी, हरिद्वार, उधम सिंह नगर) आसानी से पहुंच योग्य हैं। पड़ोसी यूपी, हरियाणा और दिल्ली से अपराधी यहां छिप सकते हैं। NCRB 2025 रिपोर्ट में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में अवैध हथियारों के मामलों में शीर्ष पर है—1,767+ मामले। उधम सिंह नगर अवैध हथियारों का हब बन चुका है, जहां अधिकांश तस्करी यूपी जैसे राज्यों से होती है।
शहरीकरण और रियल एस्टेट बूम-
देहरादून में तेज विकास ने बाहरी लोगों को आकर्षित किया। गैंगस्टर प्रॉपर्टी, होटल या व्यवसाय की आड़ में बस जाते हैं। विक्रम शर्मा जैसे कई मामले सामने आए जहां अपराधी ‘व्यवसायी’ बनकर रहते हैं।
इंटेलिजेंस और पुलिस की कमजोरी
हालिया हत्याओं में पुलिस को पहले से भनक नहीं लगी। सोशल मीडिया पर लोग कहते हैं कि “इंटेलिजेंस नेटवर्क विफल है”। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराई और पुलिस फेरबदल किए (SSP अजय सिंह सहित कई तबादले), लेकिन जनता में विश्वास की कमी बनी हुई है।
पुरानी प्रवृत्ति: 2023 से रिपोर्ट्स में मैदानी जिले अपराधियों की शरणस्थली बताए गए हैं—पंजाब, दिल्ली, यूपी से अपराधी यहां पनाह लेते हैं। 2025 में STF ने गैंगस्टर, ड्रग माफिया पर कार्रवाई की (18 इनामी गिरफ्तार, ₹22.86 करोड़ ड्रग्स जब्त), लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई।
राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार को कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ‘देवभूमि’ की छवि और ज्यादा खराब होगी। जनता को सुरक्षित, शांतिपूर्ण जीवन का अधिकार है—यह सुनिश्चित करना सरकार, पुलिस और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
