डॉ. अजय मोहन सेमवाल
उत्तराखंड में भाजपा सरकार मैं मजबूरन सभी आल इज वैल तो कह रहे हैं परंतु ऐसा नहीं है क्योंकि ऐसा कहना सख्त अनुशासन के कारण मजबूरी है असंतोष के सुर दिल्ली दरबार तक सुनाई देते ह उत्तराखंड भाजपा में 2027 के मंथन और डैमेज कंट्रोल के लिए एक कोर ग्रुप की मीटिंग रखी गई जिसमें अधिकांश कैबिनेट मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्री को इस मीटिंग से दूर रखा गया और प्रदेश प्रभारी भी इस कोर ग्रुप की मीटिंग में शामिल नहीं हो पाए कुल मिलाकर मीटिंग मैं मंथन तो हुआ परंतु इस मंथन से क्या 2027 के लिए अमृत निकल पाया यह बड़ा सवाल है।
उत्तराखंड भाजपा में सियासी उठापटक का दौर जारी है, और पार्टी अपनो की आंच मे झुलस रही है बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए चिंता का बड़ा सबक है इस डैमेज को कंट्रोल करना इतना आसान नहीं है, भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी में अनुशासन तोड़ने वाले माननीयो की कमी नहीं है पार्टी गुटबाजी के भंवर में फंसी नजर आ रही है परंतु बार-बार हाई कमान के सख्त अनुशासन के कारण मन ही मन बहुमत के दर्द को पीकर आल इस वेल कहना मजबूरी बन गया है परंतु मजबूरी कब तक यह यक्ष प्रश्न पार्टी को सता रहा है।
देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। 14 फरवरी 2026 को देहरादून (जौलीग्रांट) में आयोजित प्रदेश कोर ग्रुप/कोर कमेटी की बैठक ने पार्टी के अंदरूनी गतिशीलता को न केवल उजागर किया, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई यह बैठक 2027 विधानसभा चुनाव की औपचारिक रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन इसमें राज्य प्रभारी दुष्यंत गौतम अनुपस्थिति सबसे बड़ी खबर बनी।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह थी कि बैठक से कैबिनेट मंत्रियों की अधिकांश संख्या को दूर रखा गया और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों (विजय बहुगुणा तथा तीरथ सिंह रावत) को भी बाहर कर दिया गया। यह बैठक पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव, प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन और आंतरिक असंतोष के संकेत दे रही है।यह बैठक नई संगठनात्मक संरचना के बाद पहली प्रमुख कोर कमेटी बैठक थी, जिसमें पार्टी ने स्पष्ट रूप से मिशन 2027 पर फोकस किया। जेपी नड्डा ने बैठक की अध्यक्षता की, जबकि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संचालन किया। उपस्थित प्रमुख नेता थे:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
संगठन महामंत्री अजय सिंह (संगठन)।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और रमेश पोखरियाल निशंक।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा।
सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, माला राज्य लक्ष्मी शाह, नरेश बंसल और अन्य।बैठक में कुल 14 बड़े नेता शामिल हुए। कैबिनेट से केवल सतपाल महाराज और धन सिंह रावत को आमंत्रित किया गया, जबकि अन्य मंत्रियों (जैसे शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के अलावा अन्य) को बाहर रखा गया।
तीनों प्रदेश महामंत्रियों को भी कोर ग्रुप से हटा दिया गया। यह संरचनात्मक बदलाव पार्टी की नई रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां प्रदर्शन और विजनेबिलिटी (जीत की संभावना) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रभारी दुष्यंत गौतम की अनुपस्थिति कैसी मजबूरी।
बैठक की सबसे चर्चित अनुपस्थिति दुष्यंत गौतम की थी। महेंद्र भट्ट ने सफाई दी कि गौतम अन्य कार्यक्रम में व्यस्त थे और सह-प्रभारी पश्चिम बंगाल चुनाव कार्य में लगे थे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर देख रहे हैं। 2022 के इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य को उम्रकैद हुई, लेकिन ‘VIP’ कनेक्शन की चर्चाएं जारी हैं। दिसंबर 2025 में लीक ऑडियो-वीडियो में ‘गट्टू’ नाम से गौतम का जिक्र हुआ, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूर रखना शुरू किया। पोस्टरों-होर्डिंग्स से उनका नाम हटाया गया, और अब बैठक से अनुपस्थिति ने अटकलें तेज कर दी हैं।नई राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में बड़े फेरबदल की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि गौतम का प्रभारी पद बदल सकता है। कांग्रेस और AAP इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं।
बैठक में कैबिनेट मंत्रियों की सीमित उपस्थिति (केवल दो) और तीन प्रदेश महामंत्रियों की अनुपस्थिति पार्टी की नई सोच दर्शाती है। महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि टिकट वितरण में विजनेबिलिटी, प्रदर्शन, ऊर्जा और जनस्वीकार्यता एकमात्र आधार होंगे। पुराने चेहरों पर सख्ती होगी, जबकि युवा और महिला नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी।
पूर्व मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत को कोर कमेटी से पूरी तरह बाहर कर दिया गया। केवल त्रिवेंद्र और निशंक शामिल थे। यह पीढ़ीगत रीसेट का स्पष्ट संकेत है। पार्टी अब ग्रासरूट स्तर पर नए चेहरों को आगे लाना चाहती है, लेकिन इससे असंतोष बढ़ सकता है।
बैठक के प्रमुख फैसले और 2027 की रणनीति
संगठन-सरकार समन्वय मजबूत करना — ‘डबल इंजन’ की सफलताओं को ग्रासरूट तक पहुंचाना।
बूथ स्तर मजबूती और प्रशिक्षण महाभियान — 23 मार्च को मेगा रैली (पीएम मोदी आमंत्रित)।
चुनावी रणनीति — UCC, नकल विरोधी कानून, हिंदुत्व और विकास पर आक्रामक अभियान।
17 फरवरी से जिला स्तर पर बैठकें प्रस्तावित हैं। पार्टी ने 80% ब्लॉक स्तर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
उत्तराखंड में भाजपा की स्थिति मजबूत है—UCC जैसे सुधार, हिंदुत्व और विकास का आधार। लेकिन बिना प्रभारी, सीमित मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों वाली बैठक ने आंतरिक चुनौतियां उजागर की हैं। पार्टी को असंतोष को संवाद से सुलझाना होगा। देवभूमि की जनता विकास और नैतिकता दोनों चाहती है। यदि भाजपा एकजुट रहकर मिशन 2027 पर फोकस करती है, तो बड़ी जीत संभव है। अन्यथा, विपक्ष फायदा उठा सकता है। समय आ गया है कि पार्टी आंतरिक कलह को पार कर जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करे।
उत्तराखंड में भाजपा के लिए 2027 की डगर बहुत कठिन तो नहीं है परंतु पूर्ण बहुमत की सरकार बने इसके लिए पार्टी को अभी से ग्राउंड लेवल पर आकर जन-जन तक पहुंचना होगा सिर्फ चुनावी वादों से सरकार चुनाव नहीं जीत सकती क्योंकि जनता जागरुक हो चुकी है और पंचायत चुनाव में इसका असर देखने को मिला जहां भाजपा के प्रत्याशियों को जनता ने नकार दिया परंतु बहुमत की सरकार होने के कारण निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा में शामिल और भाजपा का गढ और मजबूत हो गया।
कांग्रेस के लिए यह चिंता का बड़ा कारण है क्योंकि कांग्रेस के पास बूथत स्तर पर कार्यकर्ता और टीमवर्क का अभाव है और चुनाव जीतने के लिए बूथ स्तर पर कर्मठ कार्यकर्ता और टीम होना अति आवश्यक है। कुल मिलाकर भाजपा के लिए कोर ग्रुप का मंथन कितना कारगर साबित होगा यह 2027 में पता चलेगा।
