सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह और राजनाथ सिंह ने चीन सीमा से जुड़े मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान का कड़ा विरोध किया। यह विवाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सामने आया।
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत एक पत्रिका की रिपोर्ट का हवाला देते हुए की, जो कथित तौर पर पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा पर आधारित थी। उन्होंने वर्ष 2020 की एक घटना का उल्लेख करते हुए डोकलाम का जिक्र किया और दावा किया कि चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे और कैलाश रेंज के बेहद करीब पहुंच गए थे। उनके इस बयान के बाद सदन में हंगामा हो गया। साथ ही सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई कि वह 2017 के डोकलाम गतिरोध की बात कर रहे थे या 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई उस झड़प की, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी को बीच में रोकते हुए कहा कि किसी भी सदस्य को किसी अप्रकाशित पुस्तक से उद्धरण देने की अनुमति नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से सदन के सामने उस पुस्तक को प्रमाणित करने को कहा, जिसका वह हवाला दे रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह ने भी सवाल उठाया कि जब पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है, तो राहुल गांधी को यह जानकारी कैसे मिली।
इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि चीन से जुड़ा मामला अत्यंत संवेदनशील है और विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।
लगातार हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फैसला सुनाया कि नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण तक ही अपनी बात सीमित रखनी होगी और किसी अप्रकाशित सामग्री का हवाला नहीं दिया जा सकता। उन्होंने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सत्र की चर्चा से असंबंधित या अप्रमाणित स्रोतों से कुछ भी पढ़कर नहीं सुनाया जा सकता।
